Indore News: भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा द्वारा घोषित नई कार्यकारिणी पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नाराज कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय में सुमित मिश्रा के नाम की कालिख पोती, पोस्टर फाड़े और 28 से अधिक लोगों ने इस्तीफा दे दिया।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने अपनी नियुक्ति के लगभग 9 महीने बाद मंगलवार को नई नगर कार्यकारिणी की घोषणा कर दी। इस 33 सदस्यीय टीम में 8 उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री और 8 मंत्री शामिल हैं। हालांकि, सूची जारी होते ही पार्टी के भीतर भूचाल आ गया।भाजपा कार्यालय में हंगामा और कालिखकार्यकारिणी की घोषणा के तुरंत बाद, नाराज भाजपा कार्यकर्ता और खाती समाज के लोग भाजपा कार्यालय पहुंचे। उन्होंने नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और “सुमित मिश्रा गुंडा है” के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने मिश्रा के केबिन के बाहर लगी नेमप्लेट और गेट पर कालिख पोत दी। इतना ही नहीं, कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर में भी सुमित मिश्रा के चेहरे पर कालिख पोती गई और बाद में पोस्टर फाड़ दिया गया। इस हंगामे के बीच 28 से अधिक कार्यकर्ताओं ने अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी।
स्वाति कासिद के नाम का भी विरोधसूची में सबसे विवादास्पद नाम स्वाति कासिद का है, जिन्हें नगर मंत्री बनाया गया है। स्वाति, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले युवराज कासिद उर्फ युवराज उस्ताद की पत्नी हैं। इस नियुक्ति के विरोध में खाती समाज के कार्यकर्ता और पदाधिकारी लामबंद हो गए और उन्होंने भाजपा कार्यालय पर धावा बोल दिया। यह पहली बार नहीं है जब स्वाति कासिद की नियुक्ति पर विवाद हुआ हो। नगर निगम चुनाव के दौरान भाजपा ने उन्हें वार्ड 56 से पार्षद का टिकट दिया था। लेकिन, पति युवराज उस्ताद की आपराधिक पृष्ठभूमि की शिकायतें सामने आने के बाद पार्टी ने महज 16 घंटे में उनका टिकट वापस ले लिया था। उस समय तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बयान दिया था कि भाजपा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों या उनके परिजनों को टिकट नहीं देती और पार्टी की ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति है।कौन है युवराज उस्ताद?स्वाति कासिद के पति युवराज कासिद उर्फ युवराज उस्ताद पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। युवराज और उसकी गैंग पर अवैध वसूली और विवादित प्रॉपर्टी के निपटारे के आरोप हैं। उस पर कुख्यात बदमाश जीतू ठाकुर की जेल में हत्या और हत्या के प्रयास के दो मामले दर्ज हैं। एसटीएफ उसे संगठित गिरोह के बदमाशों की सूची में भी शामिल कर चुकी है। प्रशासन युवराज पर दो बार राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत भी कार्रवाई कर चुका है।

