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बुधनी मध्य प्रदेश
संवाददाता डॉ रमेश चंद शर्मा
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बुधनी नगर एवं ग्रामीण अंचलों में गणेश उत्सव पूरे उत्साह और उमंग के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया गया परंतु समापन के अवसर पर इस बार श्रद्धालुओं को सबसे बड़ा धक्का उस समय लगा जब गणेश जी की प्रतिमाओं का विसर्जन नर्मदा नदी में करने की अनुमति नहीं दी गई। प्रशासन ने नदी में विसर्जन पर पूरी तरह रोक लगाते हुए छोटी से छोटी प्रतिमाओं तक के लिए भी प्रतिबंध लागू किया।
इसके लिए प्रशासन ने विशेष कर्मचारी तैनात किए और पशु चिकित्सालय के पास एक कृत्रिम गड्ढा बनाकर वहीं विसर्जन की व्यवस्था की गई परंतु बनाए गए विसर्जन कुंड में प्रतिमाओं को विसर्जित करने के लिए ना तो शीडी की व्यवस्था की गई और ना जेसीबी या पोकलेन मशीन जिसके कारण भक्तजनों ने अपनी प्रिय प्रतिमाओं को उस गड्ढे में विसर्जित करने पहुंचे परंतु संसाधनों के अभाव में उन्हें अपनी प्रतिमाएं गड्ढे में ऊपर से ही फेंकने पड़ी। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह व्यवस्था उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है।
गणेश विसर्जन करने आई अनुज्ञा झा ने बताया कि गणेश जी की नौ दिनों तक पूरे श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई, लेकिन विसर्जन के समय आस्थाओं के साथ खिलवाड़ हुआ और मूर्ति विसर्जन कृत्रिम गड्ढे में कराया गया, वहीं बुधनी के अन्य घाटों पर मूर्ति विसर्जन लगातार जारी रहा, बुधनीघाट के दूसरे घाट पर सैकड़ों लोगों ने बिना किसी व्यवस्थाओं के मूर्ति विसर्जित की उनका कहना था कि नर्मदा में रोजाना अस्थि विसर्जन होता है, गंदा नाला भी सीधे नदी में मिलता है, उस पर कोई रोक नहीं, फिर भगवान की मूर्ति विसर्जन से ही नदी क्यों दूषित मानी जाती है?
वार्ड क्रमांक 10 के पार्षद श्रीकांत शर्मा का कहना है की हिंदुओं के त्योहार पर शासन प्रशासन को प्रदूषण क्यों याद आता है जबकि फैक्ट्री का प्रदूषित पानी एवं सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निकलने वाला प्रदूषित पानी भी नर्मदा नदी में मिल रहा है।
एसडीम दिनेश सिंह तोमर का कहना है कि हमें तो शासन प्रशासन के निर्देशों का पालन करना होगा उनका तर्क था नर्मदा नदी में इस समय बाढ़ आई हुई है जिससे संभावित दुर्घटनाओं को तलने के लिए भी यह कदम उठाना पड़ा है




