केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान में एमओयू, कृषि यंत्रीकरण व महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा।

बुदनी कृषि यंत्रीकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान (सीएफएमटीटीआई), बुदनी में आज मध्यभारत कंसोर्टियम (एमबीसीएफपीसीएल) के साथ एक अहम समझौता ज्ञापन एम ओ यू पर हस्ताक्षर किए गए। यह पहल प्रदेश के किसान उत्पादक संगठनों , महिला कृषकों एवं युवाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।समारोह में सीएफएमटीटीआई की ओर से निदेशक डॉ. बी. एम. नांदेड़े सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं एमबीसीएफपीसीएल की ओर से मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री योगेश द्विवेदी एवं प्रबंधक (क्षेत्रीय विकास) संदीप शुक्ला मौजूद रहे।समझौते के प्रमुख बिंदुएमओयू के अंतर्गत निम्न गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी—क्षेत्र विशेष आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रममहिला अनुकूल कृषि यंत्रों पर विशेष प्रशिक्षण एवं प्रदर्शनकृषि यंत्रों के संचालन एवं रखरखाव का प्रशिक्षणड्रजरी (परिश्रम) न्यूनीकरण एवं एर्गोनॉमिक्स आधारित उपकरणों का प्रसारसौर ऊर्जा एवं गैर-पारंपरिक ऊर्जा उपकरणों के उपयोग पर जागरूकताकिसानों, महिलाओं एवं युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रमसीएफएमटीटीआई द्वारा प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। सभी कार्यक्रम भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित होंगे।एमबीसीएफपीसीएल प्रदेश के विभिन्न जिलों से किसानों, एफपीओ सदस्यों एवं इच्छुक प्रतिभागियों का चयन एवं नामांकन सुनिश्चित करेगा। यह समझौता तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। दोनों संस्थाएं संयुक्त रूप से कार्यशालाएँ, प्रदर्शन कार्यक्रम, तकनीकी सेमिनार एवं प्रचार-प्रसार गतिविधियाँ संचालित करेंगी।अधिकारियों के वक्तव्यनिदेशक डॉ. बी. एम. नांदेड़े ने कहा कि यह समझौता किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों एवं तकनीकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विशेष रूप से महिला किसानों की भागीदारी बढ़ाने और श्रम कम करने वाली तकनीकों के प्रसार पर जोर दिया।एमबीसीएफपीसीएल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री योगेश द्विवेदी ने विश्वास व्यक्त किया कि इस साझेदारी से प्रदेश के लाखों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा कृषि उत्पादन, आय संवर्धन एवं रोजगार सृजन के नए अवसर विकसित होंगे।यह समझौता कृषि यंत्रीकरण के क्षेत्र में संस्थागत समन्वय का एक सशक्त उदाहरण है, जो मध्यप्रदेश के किसानों को आधुनिक तकनीक, कौशल एवं नवाचार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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