सगे फूफा ने लूटी थी भतीजी की अस्मत, कोर्ट ने दी उम्रकैद और लगाया एक लाख का हर्जाना

सीहोर जिले के दोराहा क्षेत्र में नाबालिग को बहला-फुसलाकर राजस्थान ले जाकर दुष्कर्म करने वाले फूफा को अदालत ने आजीवन कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। पुलिस ने पीड़िता को मुक्त कर आरोपी गिरफ्तार किया। न्यायालय ने पीड़िता को प्रतिकर देने का भी आदेश दिया।

सीहोर जिले के दोराहा थाना क्षेत्र में रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करने वाले रिश्तेदार को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोराहा क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर राजस्थान ले जाकर दरिंदगी करने वाले फूफा पर अदालत ने एक लाख का जुर्माना भी लगाया है। घटना की शुरुआत 7 जून 2024 को हुई, जब दोराहा थाना क्षेत्र से 16 वर्षीय नाबालिग लड़की रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गई। पीड़िता की मां ने जब उसके पिता को सूचना दी कि बेटी घर पर नहीं है, तो हड़कंप मच गया। आसपास और रिश्तेदारों में तलाश के बावजूद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो पिता का शक अपने ही बहनोई (पीडिता के फूफा) पर गहराया, क्योंकि उसका फोन भी बंद आ रहा था। पिता की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी और अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

सुनियोजित अपहरण और राजस्थान का वह काला कमरा
पुलिस जांच और पीड़िता के बयानों से जो हकीकत सामने आई, वह रूह कंपा देने वाली थी। आरोपी फूफा ने उस समय नाबालिग को अपना शिकार बनाया जब वह घर से दुकान की ओर जा रही थी। चलो पास ही घूम कर आते हैं कहकर उसने उसे बाइक पर बिठाया और फिर घर पर सूचना देने से रोक दिया। आरोपी उसे भोपाल ले गया और वहां से बस के जरिए जयपुर, फिर सीकर और अंततः राजस्थान के एक दूरदराज गांव में ले गया। वहां एक परिचित के घर काम करते हुए उसने एक कमरा लिया, जो बाद में पीड़िता के लिए नर्क बन गया। पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि 9 जून 2024 की रात फूफा ने अपनी मर्यादाओं को ताक पर रखकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। यह सिलसिला अगले 4-5 दिनों तक जारी रहा। दरिंदा सिर्फ शारीरिक शोषण तक नहीं रुका, बल्कि उसने किशोरी को जान से मारने और किसी को न बताने की धमकी देकर उसके मन में गहरा खौफ पैदा कर दिया। 

पुलिस की दबिश और आरोपी की गिरफ्तारी
इधर, दोराहा पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों की मदद से लगातार आरोपी का पीछा कर रही थी। 16 जून 2024 को पुलिस ने राजस्थान के उस गांव में दबिश दी और पीड़िता को आरोपी के चंगुल से मुक्त कराया। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया और पुलिस ने गहन जांच के बाद ठोस साक्ष्यों के साथ अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई पॉक्सो एक्ट की विशेष न्यायाधीश स्मृता सिंह ठाकुर की अदालत में हुई। सहायक जिला अभियोजन अधिकारी रेखा यादव ने पीड़िता का पक्ष मजबूती से रखते हुए दलील दी कि ऐसे जघन्य कृत्य करने वाले समाज के लिए खतरा हैं, खासकर जब आरोपी खुद करीबी रिश्तेदार हो। न्यायालय ने अभियोजन के तर्कों, चिकित्सकीय रिपोर्ट और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को दोषी पाया।

न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देकर आजीवन कारावास से दंडित किया। साथ ही न्यायालय ने पीड़िता के मानसिक और शारीरिक संताप को देखते हुए उसे एक लाख रुपये प्रतिकर के रूप में देने का आदेश शासन को दिया।

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