नवंबर के शुरुआती दिनों में बादलों और धूप के बीच मौसम स्थिर नहीं था, पर जैसे-जैसे आसमान साफ हुआ, रातें और ज्यादा ठंडी हो गईं। बादलों के हटने से धरती की गर्मी तेजी से बाहर निकल रही है, जिससे रात के तापमान में रिकॉर्ड गिरावट हो रही है।

सीहोर में ठंड का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि मंगलवार सुबह न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि दोपहर में पारा 25 डिग्री तक पहुंच गया। दिन और रात के तापमान में 20 डिग्री का तेज अंतर मौसम की सख्ती बयां कर रहा है। बीते एक सप्ताह से जैसे मौसम की रफ्तार थम ही नहीं रही है और कंपकंपी बढ़ती जा रही है। हवा में घुली सर्द नमी और बर्फीली लहरें शहर को पूरी तरह सर्दियों की गिरफ्त में ले चुकी हैं।बादलों के छंटते ही बढ़ी सर्द हवाएंमौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएस तोमर के अनुसार नवंबर के शुरुआती दिनों में बादलों और धूप के बीच मौसम स्थिर नहीं था, पर जैसे-जैसे आसमान साफ हुआ, रातें और ज्यादा ठंडी हो गईं। बादलों के हटने से धरती की गर्मी तेजी से बाहर निकल रही है, जिससे रात के तापमान में रिकॉर्ड गिरावट हो रही है। पिछले 10 दिनों में मौसम ने एकदम करवट ली है। बरसात और उमस की अनुभूति के बाद अचानक तेज सर्दी ने लोगों को स्तब्ध कर दिया है।
अलाव के सहारे रातें काट रहे लोगठंड के बढ़ते असर के बीच शाम ढलते ही सड़कें सूनी दिखने लगी हैं। चाय की दुकानों, चौक-चौराहों और मोहल्लों में अलाव के पास भीड़ जुटना आम दृश्य हो गया है। बच्चे हों या बुजुर्ग, सब गर्म कपड़ों में लिपटते नजर आ रहे हैं। रात के वक्त मजदूर, रिक्शा चालकों और राहगीरों के लिए अलाव जीवनरक्षक बन गया है। दुकानों के सामने अंगीठियों की बिक्री बढ़ गई है और कपड़ा दुकानों में जैकेट, स्वेटर और मफलर की भारी मांग देखी जा रही है।मरीजों की संख्या बढ़ीठंड की तीव्रता के बीच जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या अचानक बढ़कर एक हजार के पार पहुंच गई है। इनमें सबसे अधिक बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। खांसी, जुकाम, गले के संक्रमण, वायरल फीवर और दमा के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार ठंड का झटका शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे बीमारियां तेजी से फैलती हैं। खासकर हृदय रोगियों के लिए तापमान में तेज गिरावट काफी खतरनाक सिद्ध हो सकती है।
