भोपाल के हमीदिया अस्पताल में आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश की सबसे आधुनिक कैथ लैब का शुभारंभ करेंगे। जापान से लाई गई 7.7 करोड़ की इस मशीन से अब किडनी मरीज भी बिना खतरे के हार्ट की जांच करा सकेंगे।

हमीदिया अस्पताल में आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश की सबसे आधुनिक कैथ लैब का शुभारंभ करेंगे। जापान से लाई गई यह हाईटेक बाइ-प्लेन कैथ लैब सिस्टम 7.7 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित की गई है। नई तकनीक के कारण अब किडनी से पीड़ित मरीज भी बिना चिंता के हार्ट की एंजियोग्राफी या अन्य जांचें करवा सकेंगे। अस्पताल में यह सुविधा आज से आम मरीजों के लिए उपलब्ध होगी।कम डाई, ज्यादा सटीक इमेजइस नई मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जांच के दौरान बेहद कम मात्रा में कॉन्ट्रास्ट डाई का उपयोग किया जाता है। यही कारण है कि यह तकनीक किडनी रोगियों के लिए सुरक्षित मानी जा रही है। साथ ही स्कैनिंग के दौरान 3डी इमेज बनती है, जिससे दिल और रक्त वाहिनियों की स्पष्ट व सटीक तस्वीर मिलती है। इससे हार्ट में ब्लॉकेज या अन्य जटिलताओं का पता पहले से अधिक सटीकता से लगाया जा सकेगा।
कैसे काम करती है बाइ-प्लेन कैथ लैब- नई बाइ-प्लेन कैथ लैब में दो सी-आर्म लगे हैं, जो दो अलग-अलग कोणों से इमेजिंग करते हैं। इससे जांच का समय घटता है और मरीज को ज्यादा देर तक प्रक्रिया में नहीं रहना पड़ता।- दो सी-आर्म एक साथ कार्य करते हैं, जिससे 3डी इमेज की स्पष्टता बढ़ती है।- एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में दी जाने वाली डाई की मात्रा कम हो जाती है।- को स्क्रीन पर धमनियों की बेहतरीन डिटेल दिखाई देती है, जिससे उपचार में तेजी और सटीकता आती है।
किडनी मरीजों के लिए बड़ी राहतकैथ लैब में होने वाली एंजियोग्राफी के दौरान डाई का उपयोग ब्लड वेसल्स को दिखाने के लिए किया जाता है। आमतौर पर यही डाई किडनी फंक्शन को प्रभावित करती है और कॉन्ट्रास्ट इंड्यूस्ड नेफ्रोपैथी जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। नई तकनीक में कम डाई के उपयोग से किडनी मरीजों के लिए जांच सुरक्षित और आसान होगी।
